Thursday, March 30, 2023

श्रीराम नवमी -- विक्रमी सम्वत २०८०

श्रीराम नवमी के अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद् से सम्बद्ध राष्ट्रभाषा विचार मंच के तत्त्वावधान में एक ऑनलाइन विचार- साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें अम्बाला व अन्य स्थलों से कवियों- बुद्धिजीवियों ने भाग लिया और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम व रामकथा से सम्बन्धित सांस्कृतिक परिचर्चा में भाग लेते हुए अपनी अपनी काव्य रचनाएँ भी प्रस्तुत कीं | मंच के महामन्त्री डॉ. जय प्रकाश गुप्त द्वारा देवी सरस्वती की आराधना से कार्यक्रम के आरंभ में सभी उपस्थित प्रतिभागियों को श्रीराम नवमी की बधाई प्रेषित करते हुए सभी का स्वागत किया गया और श्रीराम जन्म सम्बन्धी प्रमाणिक शास्त्रीय वर्णन प्रस्तुत करते हुए डॉ. गुप्त ने वाल्मीकीय रामायण, अध्यात्म रामायण व रामचरितमानस से राम जन्म सम्बन्धी प्रकरण की प्रस्तुति की व उसमें एकरूपता को रेखांकित किया | राम को भारत की चेतना व अस्मिता का आधार बताते हुए डॉ. गुप्त ने श्रीराम के अनुपम गुणगान करती एक काव्य रचना पढ़ी | दिल्ली से जुड़ीं अंतर्राष्ट्रीय कवयित्री पूनम माटिया ने रामकथा के विभिन्न पात्रों को समर्पित अनेक मुक्तकों की प्रस्तुति की, सम्पाती पर बोलते हुए पूनम जी की रचना के शब्द, “बोले सम्पाती यूँ राम का काज हो, दे चुनौती कोई अब असुर राज को.. बल अतुल मति विपुल मन में विश्वास भर पार सागर करे बन पवन आज जो” | गुरुग्राम से जुड़ीं शशि आनन्द ने रामकथा सम्बन्धित अनेक दृष्टान्त प्रस्तुत करते हुए राम नाम के महत्त्व को कलियुग में अत्यन्त आशु लाभकारी बताया व इसके अनुभव भी बताए ....एक रामभजन भी प्रस्तुत किया | अम्बाला शहर से अनीता चोपड़ा ने राम नवमी पर शुभकामनाएं प्रषित करते हुए अपनी एक रचना प्रस्तुत की | पंचकुला से जुडी शिक्षिका रेखा शर्मा ने भगवान् राम की स्तुति स्वरूप २ भजन प्रस्तुत किये और रामभक्ति के महत्त्व पर अपना मत प्रस्तुत किया | कवि रोहित शर्मा ने राम जन्म का ही एक दृश्य अपनी कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया...”ढोल व् नगाड़े बजे घर और द्वार सजे देवगण सारे आज धरा को निहारे हैं, लाखों लाख लोग जाने घोर पाप कर डारे आई ऐसी घड़ी जब जनम सुधारे हैं, मात पितु गुरु सब खुशियाँ मनाए रहे थाल को सजाय सब आरती उतारे हैं, देख रहे एकटक ठहर के दिनकर चैत नवमी को मेरे राम जी पधारे हैं” | आर्य कन्या महाविद्यालय, शाहाबाद मारकंडा की पूर्व प्राचार्य डॉ. भारती बन्धु ने भी रामकथा पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए रामस्तुती में एक मधुर गीत प्रस्तुत किया व सब को शुभकामनाएं प्रेषित कीं | मंच की प्रधान डॉ. शशि धमीजा ने मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आदर्शों की विस्तृत व्याख्या करते हुए राम व रामकथा पर समाज में सन्देह उपस्थित करने वाली घटनाओं पर अपनी चिन्ता व्यक्त की व बुद्धिजीवियों द्वारा रामविरोधी विमर्श का कठोर प्रतिकार करने की अपेक्षा की | कुछ शब्दों- वाक्यों अथवा किसी कतिपय घटना की विकृत व्याख्या से राम अथवा रामकथा के लेखक के तिरस्कार का भारत में कोई स्थान नहीं होना चाहिए | डॉ. शशि धमीजा ने एक भजन भी प्रस्तुत किया व उपस्थित सभी प्रतिभागियों के प्रति मंच की ओर से आभार ज्ञापित किया | आयोजन में लखनऊ से पवन जैन, अम्बाला से ही पूनम जैन व देवकी गुप्ता ने भी सक्रिय भाग लिया | सामूहिक वन्देमातरम गायन से कार्यक्रम का समापन हुआ | डॉ. जय प्रकाश गुप्त, महामन्त्री मोब. ९३१५५१०४२५, ७०१५०५९१०१
अखिल भारतीय साहित्य परिषद् से सम्बद्ध राष्ट्रभाषा विचार मंच के तत्त्वावधान में एक ऑनलाइन विचार-साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमे अम्बाला व अन्य स्थलों से अनेक प्रतिभागियों ने विचार विनिमय के साथ अपनी काव्य रचनाएं प्रस्तुत कीं | नवसम्वत् (विक्रमी २०८०), चैत्र नवरात्र तथा भगत सिंह- राजगुरु- सुखदेव के बलिदान दिवस पर आयोजित इस संगोष्ठी में उपस्थित सभी प्रतिभागियों के स्वागत के उपरान्त मंच के महामन्त्री डॉ. जय प्रकाश गुप्ता ने देवी सरस्वती को समर्पित एक गीत प्रस्तुत किया और भारतीय नववर्ष तथा चैत्र नवरात्र पर अपने संक्षिप्त विचार प्रस्तुत किये | भगत सिंह आदि समस्त क्रान्तिकारियों के प्रति भी कृतज्ञतापूर्ण उद्गार ज्ञापित किये | फरीदाबाद से जुड़े शल्य चिकित्सक डॉ. राजीव पुण्डीर ने क्रान्तिकारियों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भारत सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से विक्रमी के स्थान पर शक सम्वत को अपनाने पर आश्चर्य व खेद प्रकट किया व विक्रमी सम्वत के सर्वकालिक महत्त्व को रेखांकित करते हुए इसे शासकीय व्यवहार और जनसामान्य में अधिक प्रयोग में लाए जाने की इच्छा प्रकट की | बलिदान दिवस पर तीनों बलिदानियों में केवल भगत सिंह पर बल दिए जाने के कारण पर भी डॉ. पुण्डीर ने आश्चर्य प्रकट किया | मंजू नान्दरा ने सभी को चैत्र नवरात्र व् नव वर्ष की शुभकामनाओं के साथ वीर क्रान्तिकारी बलिदानियों के शौर्य की चर्चा की व् औपचारिक शिक्षा पाठ्यक्रम में इन बलिदानियों के अपेक्षाकृत कम उल्लेख पर खेद प्रकट की, एक देशभक्ति का गीत भी सुनाया | अम्बाला शहर से जुड़ीं गौरी वंदना ने नवसंवत पर एक सार्थक रचना प्रस्तुत की व सभी को नववर्ष व नवरात्र की बधाई दी | पूजा बेदी ने देशप्रेम पर एक सुन्दर गीत प्रस्तुत किया जिसे सभी ने सराहा | प्रो. सुरेश लखनपाल ने भी एक भावपूर्ण देशभक्ति कविता प्रस्तुत की व सभी को नववर्ष की शुभकामना प्रेषित की | प्रधान डॉ. शशि धमीजा ने नववर्ष व् नवरात्र पर बधाई देते हुए नवरात्र के महत्त्व और देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों का वर्णन करते हुए हिन्दू जीवन में शक्ति की उपासना की उपादेयता को रेखांकित करते हुए निराला कृत "राम की शक्ति पूजा" काव्य की विस्तृत चर्चा की | भारत को फिरंगी शासन से मुक्ति दिलाने के लिए क्रान्तिकारियों की एक लम्बी श्रृंखला की चर्चा करते हुए उन्हें नमन किया और इन सभी क्रांतिकारियों के प्रमुख प्रेरणा स्रोत विनायक दामोदर सावरकर के विशेष योगदान के लिए उन्हें स्मरण किया व सावरकर को इतिहास में न्यायोचित स्थान न मिल पाने के प्रति क्षोभ व्यक्त किया | देवकी गुप्ता व अन्य प्रतिभागियों ने भी कार्यक्रम में अपनी सहभागिता की | डॉ. जय प्रकाश गुप्ता व् डॉ. शशि धमीजा द्वारा सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया गया व् सामूहिक वन्देमातरम गायन से कार्यक्रम का समापन हुआ |

श्रुतलेख प्रतियोगिता- विवेकानंद प्राथमिक पाठशाला - १४ मार्च २०२३

राष्ट्रभाषा विचार मंच द्वारा १५ फरवरी को आयोजित श्रुतलेख प्रतियोगिता का आज पुरस्कार वितरण विवेकानन्द प्राथमिक पाठशाला, रामबाग रोड, अम्बाला छावनी के सभागार में किया गया । इस प्रतियोगिता में कक्षा चार व पाँच के लगभग ४० बच्चों ने भाग लिया था । मुख्य अभ्यागत हिन्दी प्रचार प्रसार समिति अम्बाला शहर के श्री प्रेम अग्रवाल ने प्रतियोगिता में प्रथम द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त विद्यार्थियों को मंच की ओर से पुरस्कार व प्रमाण पत्र दिए । इस अवसर पर बोलते हुए प्रेम अग्रवाल ने बच्चों को प्रेरणा व प्रोत्साहन का संदेश देते हुए अपनी भाषा व राष्ट्र के प्रति समर्पित भाव से अपने उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर रहने को प्रेरित किया । इस अवसर पर उपस्थित राजकीय महाविद्यालय के अंग्रेजी शिक्षक प्रो. संजय शर्मा ने बच्चों को अपनी मातृभाषा व संस्कृत के महत्व से अवगत कराते हुए प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं प्रेषित कीं । मंच की प्रधान डॉ. शशि धमीजा ने सिद्धान्त एवम् व्यवहार दोनों में अपनी राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रति आग्रही होने पर बल देते हुए विद्यालय के विद्यार्थियों व शिक्षिकाओं की सराहना की व प्रतियोगिता में भाग लेने वाले बच्चों को बधाई दी । मंच के महामन्त्री डॉ. जय प्रकाश गुप्त ने सभी प्रतियोगी विद्यार्थियों की सराहना करते हुए विद्यालय के शिक्षक वर्ग की भी प्रशंसा की व शुभकामनाएं प्रेषित कीं व विद्यालय के प्रति आभार व्यक्त किया । विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रीमती नीलम गोगिया ने प्रतियोगिता के आयोजन के लिए राष्ट्रभाषा विचार मंच के प्रति धन्यवाद प्रस्तुत किया व भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के लिए मंच को निमन्त्रित किया । आयोजन में विशिष्ट अभ्यागत के रूप में राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की पूर्व विज्ञान शिक्षिका देवकी गुप्ता भी उपस्थित रहीं । पुरस्कारों की श्रृंखला में प्रथम पुरस्कार कक्षा पाँच की हिमांशी को, द्वितीय कक्षा पाँच की सोनम को व तृतीय कक्षा चार की अदिति को दिया गया ।

Tuesday, March 14, 2023

श्रुतलेख प्रतियोगिता का पुरस्कार वितरण- १४ मार्च २०२३

राष्ट्रभाषा विचार मंच द्वारा 15 फरवरी को आयोजित श्रुतलेख प्रतियोगिता का आज पुरस्कार वितरण विवेकानन्द प्राथमिक पाठशाला, रामबाग रोड, अम्बाला छावनी के सभागार में किया गया । इस प्रतियोगिता में कक्षा चार व पाँच के लगभग 40 बच्चों ने भाग लिया था । मुख्य अभ्यागत हिन्दी प्रचार प्रसार समिति अम्बाला शहर के श्री प्रेम अग्रवाल ने प्रतियोगिता में प्रथम द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त विद्यार्थियों को मंच की ओर से पुरस्कार व प्रमाण पत्र दिए । इस अवसर पर बोलते हुए प्रेम अग्रवाल ने बच्चों को प्रेरणा व प्रोत्साहन का संदेश देते हुए अपनी भाषा व राष्ट्र के प्रति समर्पित भाव से अपने उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर रहने को प्रेरित किया । इस अवसर पर उपस्थित राजकीय महाविद्यालय के अंग्रेजी शिक्षक प्रो. संजय शर्मा ने बच्चों को अपनी मातृभाषा व संस्कृत के महत्व से अवगत कराते हुए प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं प्रेषित कीं । मंच की प्रधान डॉ. शशि धमीजा ने सिद्धान्त एवम् व्यवहार दोनों में अपनी राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रति आग्रही होने पर बल देते हुए विद्यालय के विद्यार्थियों व शिक्षिकाओं की सराहना की व प्रतियोगिता में भाग लेने वाले बच्चों को बधाई दी । मंच के महामन्त्री डॉ. जय प्रकाश गुप्त ने सभी प्रतियोगी विद्यार्थियों की सराहना करते हुए विद्यालय के शिक्षक वर्ग की भी प्रशंसा की व शुभकामनाएं प्रेषित कीं व विद्यालय के प्रति आभार व्यक्त किया । विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रीमती नीलम गोगिया ने प्रतियोगिता के आयोजन के लिए राष्ट्रभाषा विचार मंच के प्रति धन्यवाद प्रस्तुत किया व भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के लिए मंच को निमन्त्रित किया । आयोजन में विशिष्ट अभ्यागत के रूप में राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की पूर्व विज्ञान शिक्षिका देवकी गुप्ता भी उपस्थित रहीं । पुरस्कारों की श्रृंखला में प्रथम पुरस्कार कक्षा पाँच की हिमांशी को, द्वितीय कक्षा पाँच की सोनम को व तृतीय कक्षा चार की अदिति को दिया गया । डॉ. जय प्रकाश गुप्त महामन्त्री

Thursday, July 18, 2019

हिन्दी, संस्कृत व भाषाई क्षेत्रवाद


#भाषा_बोली_और_Federalism नई शिक्षा नीति में भारत की राजभाषा के सार्वदेशिक अनिवार्य शिक्षण के नाम पर तमिलनाडु से उठे विरोध ने जिस प्रकार भारत सरकार को राष्ट्रीय एकात्मता के उस निर्णय में परिवर्तन के लिए बाध्य होना पड़ा, वह चिन्तनीय है । भाषावार प्रान्तीय गठन सहित क्षुद्र स्वार्थपूर्ण भारतीय भाषाई राजनीति ने जिस विभाजन और वैमनस्य को जन्म दिया, वर्तमान सरकार द्वारा उसे दूर करने के प्रयास का भी कोई सुफल अभी दृष्टिगोचर नहीं है । संसद में एम डी एम के के सांसद वाइको द्वारा हिन्दी के साथ संस्कृत का तिरस्कार फिरंगी द्वारा आविष्कृत और सैक्युलर गिरोह द्वारा पोषित आर्य- द्रविड़ मिथक का घातक परिणाम है जो उत्तर- दक्षिण भारत को परस्पर पारम्परिक शत्रु स्थापित करता है । इसका समाधान इतिहास के शैक्षिक पाठ्यक्रम का यथार्थ व तार्किक संशोधन अपरिहार्य है जिससे भाषाई विवाद स्वत: समाप्त हो सकता है....सम्भवतः । मराठी, बंग्ला भाषियों का यदा कदा हिन्दी विरोध विशुद्ध राजनैतिक व तात्कालिक रहता है, महत्वहीन है । जम्मू कश्मीर में कश्मीर घाटी व शेष प्रान्त में भाषाई प्राथमिकता में भेद है, कश्मीर के मुस्लिम अधिपत्य से जिस प्रकार कश्मीरी की शारदा लिपि को अरबी में परिवर्तित कर भाषाई जिहाद को आधिकारिक स्वरूप मिला वही जिहादी मानसिकता और उसका सैक्युलर समर्थन कश्मीर घाटी में संस्कृत-हिन्दी के विनाश की पृष्ठभूमि को व्याख्यायित करती है । नागालैंड की राजभाषा अंग्रेजी होना ईसाई मतान्तरण जनित है और इसके विस्तार का भी मूल कारण भारत का वीभत्स सेक्युलरवाद है । पंजाबी भाषा के नाम पर १ नवम्बर १९६६ को पंजाब के क्षेत्रफल को और कम करने का आधार भी हिन्दी/हिन्दू विरोधी सेक्युलरवाद ही रहा जिसने गुरुमुखी लिपि वाली पंजाबी भाषा के नाम पर पंजाबी को सिख मत से जोड़कर पंजाब में पृथकतावाद का बीजारोपण किया, परिणाम हमारे समक्ष है । भाषाई पंजाब की स्थापना के उपरान्त मूलरूप से वाक/बोली की शाब्दिक रिक्तता को जिस प्रकार संस्कृत/हिन्दी की अपेक्षा अंग्रेजी/अरबी के शब्दों से भरा जाने की कुचेष्टा हुई व पंजाब में हिन्दी/संस्कृत का तिरस्कार उससे पंजाब के नैसर्गिक प्रतिभा विकास को क्षति हुई है । ध्यातव्य है कि १९४७ में पाकिस्तान के जन्म के समय पंजाब का जो एक बड़ा क्षेत्र पाकिस्तान में चला गया उसमें पंजाबी बोली/वाक होते हुए भी उसकी लिपि गुरुमुखी नहीं अरबी प्रभाव वाली शाहमुखी है और भारत के पंजाब में गुरुमुखी के नाम पर देवनागरी का तिरस्कार । क्रान्तिकारी भगत सिंह ने गुरुमुखी की पंजाबी को दोषपूर्ण मानते हुए पंजाबी की लिपि देवनागरी करने का तार्किक सुझाव दिया था किन्तु वर्तमान भारतीय पंजाब ने भगत सिंह के तर्क की अवहेलना कर उसके चित्र को पगड़ी पहना दी । पंजाब के साथ लगते हरियाणा प्रान्त में गुरुमुखी वाली पंजाबी को संस्कृत के समकक्ष रखकर विद्यार्थियों की भाषाई समझ को कुण्ठित किया गया वह भाषाई आतंकवाद व उसके सैक्युलर समर्थन का वीभत्स रूप है । जिस काम चलाऊ गुरुमुखी को एक सामान्य छात्र एक शैक्षणिक सत्र में भली भान्ति सीख कर आवश्यकता पड़ने पर गुरुमुखी को लिख पढ़ सकता है उसे विकल्प के नाम पर संस्कृत से वंचित रखना अन्याय ही नहीं राष्ट्रघात है । संस्कृत व हिन्दी कोई क्षेत्रीय/आंचलिक/पान्थिक भाषाएं नहीं अपितु सम्पूर्ण भारत की सांस्कृतिक अस्मिता व मनीषा का सर्वग्राही स्रोत हैं । सम्पर्क भाषा के रूप में हिन्दी की मान्यता निर्दोष व सहज है और अपनी संस्कृति, अस्मिता संरक्षण के लिए संस्कृत । जैसे भी हो इन दोनों भाषाओं और देवनागरी लिपि के संरक्षण- संवर्धन से भारत की एकात्मता को बल मिलेगा, यह निश्चित है । डॉ. जय प्रकाश गुप्त

Tuesday, January 26, 2016

स्थापना दिवस समारोह- २६ जनवरी २०१६


हरगोलाल कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, अम्बाला छावनी के सभा कक्ष में राष्ट्रभाषा विचार मंच के स्थापना दिवस के अवसर पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया, कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच की प्रधान डॉ. शशि धमीजा ने की व मंच के महा-मन्त्री डॉ. जय प्रकाश गुप्त ने कार्यक्रम का सञ्चालन किया ! पारम्परिक व्यवस्था के अनुरूप कार्यक्रम का प्रारम्भ सरस्वती वन्दना से हुआ, जिसके निमित्त स्थानीय सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय के व्याकरण आचार्य डॉ. नरेश बत्तरा ने संस्कृत में सरस्वती वन्दना का गायन किया ! डॉ. जय प्रकाश गुप्त ने मंच का वृत्त प्रस्तुत करते हुए भाषा- संस्कृति के माध्यम से संस्कृतक राष्ट्रवाद के प्रति मंच की निष्ठा को रेखांकित किया ! डॉ. नरेश बत्तरा ने संस्कृत में एक राष्ट्रभक्ति गीत प्रस्तुत किया जो सभी द्वारा सराहा गया ! संस्कृति संरक्षण के विषय में विषद चर्चा में भाग लेते हुए राजकीय महाविद्यालय के अंग्रेजी प्राध्यापक प्रो. संजय शर्मा, विचारक परितोष सिंगला, संजय प्रधान, राजमणि उपाध्याय, डॉ. शशि धमीजा व डॉ. जय प्रकाश गुप्त ने अपने अपने भाव प्रस्तुत किए, एक बात पर सभी एकमत रहे कि हमें निजी क्रियाकलाप में राष्ट्रभाषा हिन्दी का अधिकाधिक प्रयोग करना चाहिए व अपने संपर्क में आने वालों से भाषा- संस्कृति सम्वर्धन व संरक्षण के विषय में सम्वाद करना चाहिए ! समापन वक्तव्य डॉ. शशि धमीजा द्वारा दिया गया, तत्पश्चात सामूहिक "वन्देमातरम" गायन के साथ की कार्यक्रम की समाप्ति हुई !

भगवा कवि सम्मलेन- २५ दिसम्बर २०१५


पूर्व प्रधान-मन्त्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्मदिन (२५ दिसम्बर) के अवसर पर स्थानीय रोटरी मूक बधिर विद्यालय के प्रांगण में राष्ट्रभाषा विचार मंच के तत्वावधान में एक भगवा कवि-सम्मलेन का आयोजन किया गया ! अटल जी के विचारों- कविताओं व उपस्थित कवियों की रचनाओं से समृद्ध इस कार्यक्रम की अध्यक्षता राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के अंग्रेजी प्राध्यापक प्रो. संजय शर्मा ने की ! कार्यक्रम का प्रारम्भ मंच के महा-मन्त्री डॉ. जय प्रकाश गुप्त द्वारा प्रस्तुत काव्यमयी सरस्वती वन्दना से हुआ, जिसके तुरन्त उपरान्त अटल जी की "गगन में लहरता है भगवा हमारा" शीर्षक वाली रचना का पाठ डॉ. गुप्त ने किया ! कवि सत-पल सभरवाल ने भी एक रचना अटल जी की सुनाई व एक अपनी रचना कन्या भ्रूण हत्या पर पढ़ी, श्रीमती रश्मि भटनागर ने भारत राष्ट्र को समर्पित अपनी रचना पढ़ी, मंच के उप-प्रधान व रोटरी विद्यालय के प्राचार्य उदय ठाकुर से प्रकृति संरक्षण व संवर्धन से सम्बन्धित रचना का पाठ किया, मंच के मन्त्री व एस इ जैन कालेज अम्बाला शहर के प्राचार्य डॉ. प्रदीप स्नेही ने महिलाओं को समर्पित अपनी श्रेष्ठ रचना पढ़ी, नैशनल अवयार्नैस फोरम के महासचिव बलभद्र देव थापर ने भी अपनी २ रचनाएं पढ़ीं, इसके अतिरिक्त श्रीकृष्ण सैनी व अन्यों ने भी अपनी रचनाएं पढ़ीं ! संजय प्रधान जी ने वर्त्तमान में भारत में उपस्थित कुछ समस्याओं व उनके समाधान की चर्चा की ! अध्यक्षता कर रहे प्रो. संजय शर्मा ने भारतीय राष्ट्रवाद की चर्चा के साथ वैश्विक आतंकवाद के मूल में इस्लाम की जिहादी विचारधारा के उद्भव व विस्तार के विषय में प्रमाणिक तथ्य उपस्थित किये ! सर्वसम्मति से भगवा आतंकवाद के नाम पर साध्वी प्रज्ञा, असीमानन्द आदि सभी राष्ट्रवादियों को तुरंत कारावास से मुक्त करने की मांग केन्द्र सरकार व न्यायालयों से की गई ..जिससे भगवा आतंक का कलंक भारतभूमि से मिट सके ! कार्यक्रम का समापन सामूहिक वन्देमातरम गायन से हुआ ! कार्यक्रम का सञ्चालन डॉ. जय प्रकाश गुप्त ने किया !